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कोई भी जमीन या प्लॉट विवाद में है या नहीं, घर बैठे ऐसे पता करें

कोई भी जमीन या प्लॉट विवाद में है या नहीं, घर बैठे ऐसे पता करें

प्रॉपर्टी (Property), जमीन, प्लॉट या खेत खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का एक बहुत बड़ा सपना और सबसे बड़ा वित्तीय निवेश (Financial Investment) होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई एक घर या जमीन खरीदने में लगा देते हैं। लेकिन, रियल एस्टेट (Real Estate) के क्षेत्र में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। अक्सर ऐसा होता है कि भू-माफिया या चालाक विक्रेता किसी विवादित जमीन (Disputed Land), बैंक में गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी या कोर्ट में चल रहे मुकदमे वाली जमीन को किसी भोले-भाले ग्राहक को बेच देते हैं। इसके बाद खरीदार को कोर्ट-कचहरी और वकीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उसका पैसा और मानसिक शांति दोनों छिन जाती हैं।

ऐसी किसी भी बड़ी धोखाधड़ी से बचने के लिए यह अत्यंत अनिवार्य है कि आप कोई भी जमीन, प्लॉट या खेत का बयाना (Token Money) देने या उसकी रजिस्ट्री कराने से पहले यह अच्छी तरह से जाँच लें कि वह जमीन किसी विवाद में तो नहीं है? क्या उस पर कोई कोर्ट केस चल रहा है? या क्या उस जमीन पर बैंक से कोई लोन (Bank Loan) लिया गया है? पहले इन सब बातों का पता लगाने के लिए तहसील और कचहरी के महीनों चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब डिजिटलीकरण (Digitalization) के इस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व परिषद ने ‘यूपी भूलेख’ (UP Bhulekh) और अन्य ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से इसे बेहद आसान बना दिया है। आइए इस विस्तृत लेख में हम आपको स्टेप-बाय-स्टेप बताते हैं कि आप अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर से घर बैठे किसी भी जमीन का पूरा ‘कच्चा-चिट्ठा’ (Land Record & Dispute Status) कैसे निकाल सकते हैं।

जमीन में विवाद (Land Disputes) के मुख्य कारण क्या होते हैं?

जमीन की खरीद-फरोख्त से पहले आपको यह समझना होगा कि किसी जमीन पर विवाद किन-किन कारणों से हो सकता है। आमतौर पर जमीन विवाद के निम्नलिखित प्रमुख कारण होते हैं:

  • पारिवारिक बंटवारा (Family Dispute): यदि जमीन पैतृक (Ancestral) है और भाइयों या वारिसों के बीच उसका कानूनी रूप से बंटवारा नहीं हुआ है, तो एक वारिस द्वारा बेची गई जमीन पर दूसरा वारिस कोर्ट से स्टे (Stay) ला सकता है।
  • बैंक में गिरवी (Mortgaged Property): कई बार विक्रेता अपनी जमीन के कागजात (खतौनी) बैंक में रखकर भारी लोन ले लेता है और लोन चुकाए बिना ही उसी जमीन को दूसरे व्यक्ति को बेच देता है।
  • डबल रजिस्ट्री (Double Registry): भू-माफिया एक ही प्लॉट या जमीन को अलग-अलग समय पर दो या तीन अलग-अलग लोगों को बेच देते हैं, जिससे मालिकाना हक का गंभीर विवाद पैदा हो जाता है।
  • सरकारी या वन विभाग की जमीन: कई बार ग्राम समाज (Gram Samaj), चरागाह, तालाब या वन विभाग (Forest Department) की जमीन पर अवैध कब्जा करके उसकी फर्जी रजिस्ट्री कर दी जाती है।
  • न्यायालय का स्टे (Court Stay Order): जमीन पर सिविल कोर्ट (Civil Court) या हाई कोर्ट में कोई टाइटल सूट (Title Suit) चल रहा हो और कोर्ट ने उसकी खरीद-बिक्री पर रोक (Stay) लगा रखी हो।

यूपी भूलेख (UP Bhulekh) से कैसे पता करें कि जमीन पर विवाद है या नहीं?

उत्तर प्रदेश में किसी भी कृषि भूमि (Agricultural Land) या प्लॉट का स्टेटस चेक करने का सबसे प्रामाणिक तरीका ‘यूपी भूलेख’ पोर्टल है। यहाँ खतौनी (Khatauni) में दर्ज ‘टिप्पणी’ (Remarks) के जरिए जमीन का पूरा हाल पता चल जाता है। इसके लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upbhulekh.gov.in को खोलें।
  2. खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें: होमपेज पर आपको ‘खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें’ का एक विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  3. कैप्चा दर्ज करें: सुरक्षा कारणों से स्क्रीन पर एक कैप्चा कोड (Captcha Code) दिखाई देगा, उसे दर्ज करके ‘Submit’ बटन दबाएं।
  4. अपना क्षेत्र चुनें: अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जहाँ आपको सबसे पहले अपने जनपद (District) का चुनाव करना है, उसके बाद अपनी तहसील (Tehsil) चुनें और अंत में अपने ग्राम (Village) का नाम चुनें (जहाँ वह जमीन स्थित है)।
  5. खसरा/गाटा संख्या दर्ज करें: ग्राम चुनने के बाद आप जमीन को तीन तरीकों से खोज सकते हैं— 1. खसरा/गाटा संख्या द्वारा, 2. खाता संख्या द्वारा, 3. खातेदार (मालिक) के नाम द्वारा। सबसे सटीक तरीका है कि आप जमीन का ‘खसरा या गाटा संख्या’ दर्ज करके ‘खोजें’ (Search) पर क्लिक करें।
  6. उद्धरण देखें (View Khatauni): सही गाटा संख्या पर क्लिक करने के बाद ‘उद्धरण देखें’ (View) पर क्लिक करें। आपके सामने उस जमीन की पूरी ‘डिजिटल खतौनी’ खुल जाएगी।

खतौनी (Khatauni) में क्या-क्या चेक करें?

खतौनी खुलने के बाद आपको मुख्य रूप से तीन चीजों पर बारीक नजर डालनी है:

खतौनी का कॉलम क्या जाँच करनी है? (What to check)
खातेदार का नाम (Owner’s Name) सबसे पहले देखें कि जो व्यक्ति आपको जमीन बेच रहा है, क्या खतौनी में उसी का नाम दर्ज है? यदि खतौनी में किसी मृतक (पिता/दादा) का नाम है, तो पहले उसे ‘विरासत’ दर्ज करवाकर अपने नाम पर खतौनी करवानी होगी।
टिप्पणी / आदेश (Remarks / Orders) यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। खतौनी के सबसे आखिरी कॉलम में ‘टिप्पणी’ या ‘आदेश’ लिखा होता है। यदि जमीन पर कोर्ट का स्टे (Stay), कुर्क (Attachment) या कोई पारिवारिक मुकदमा चल रहा है, तो लेखपाल यहाँ आदेश दर्ज कर देता है। यदि यह कॉलम पूरी तरह खाली है, तो जमीन सुरक्षित मानी जाती है
बंधक का विवरण (Loan/Mortgage) यदि किसान ने KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) या किसी बैंक से इस जमीन पर लोन लिया है, तो टिप्पणी कॉलम में लिखा होगा— “यह भूमि फल-फलां बैंक के पास बंधक (Mortgaged) है।” ऐसी जमीन तब तक न खरीदें जब तक बैंक का NOC न मिल जाए।

ई-कोर्ट्स (eCourts) के माध्यम से सिविल मुकदमों की जाँच कैसे करें?

कई बार सिविल कोर्ट (दीवानी न्यायालय) में मुकदमा चल रहा होता है, लेकिन उसकी एंट्री तुरंत खतौनी (यूपी भूलेख) में नहीं हो पाती। इसलिए, 100% संतुष्टि के लिए आपको भारत सरकार के eCourts Portal (services.ecourts.gov.in) पर भी जाँच कर लेनी चाहिए:

  • eCourts Services की वेबसाइट या मोबाइल ऐप खोलें।
  • ‘Case Status’ (वाद की स्थिति) के विकल्प पर क्लिक करें।
  • अपना राज्य (State), जिला (District) और संबंधित न्यायालय परिसर (Court Complex) चुनें।
  • अब ‘Party Name’ (पक्षकार का नाम) का विकल्प चुनें।
  • जो व्यक्ति आपको जमीन बेच रहा है, उसका पूरा नाम दर्ज करें और ‘Search’ करें।
  • यदि उस व्यक्ति के नाम से उस कोर्ट में कोई भी जमीन विवाद का सिविल सूट, टाइटल सूट या क्रिमिनल केस चल रहा होगा, तो उसकी पूरी लिस्ट आपके सामने आ जाएगी।

रजिस्ट्रार ऑफिस से 12 साला (Encumbrance Certificate) निकलवाएं

ऑनलाइन खतौनी में केवल कृषि भूमि का विवरण होता है। यदि आप शहर में कोई आवासीय प्लॉट, मकान या फ्लैट खरीद रहे हैं, तो उसका विवाद चेक करने का सबसे पुख्ता तरीका भारमुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) यानी ’12 साला’ निकलवाना है।

इसके लिए आप संबंधित जिले के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (Sub-Registrar Office) में जाकर या उत्तर प्रदेश के ‘IGRS UP’ (igrsup.gov.in) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि पिछले 12 या 30 सालों में इस प्रॉपर्टी को कितनी बार बेचा गया है, और इस पर किसी बैंक का कोई बकाया लोन या कानूनी रोक तो नहीं है। यदि सर्टिफिकेट एकदम ‘Nil’ (शून्य) आता है, तो संपत्ति पूरी तरह से साफ़-सुथरी और विवाद रहित है।

RERA (रेरा) वेबसाइट पर बिल्डर के प्रोजेक्ट की जाँच करें

यदि आप किसी प्राइवेट बिल्डर (Builder) या कॉलोनाइज़र से फ्लैट या प्लॉट खरीद रहे हैं, तो कभी भी बिना ‘रेरा’ अप्रूवल के प्रॉपर्टी न खरीदें। आप UP RERA (up-rera.in) की वेबसाइट पर जाकर उस प्रोजेक्ट का ‘RERA Registration Number’ डालकर सर्च कर सकते हैं। इससे आपको पता चल जाएगा कि प्रोजेक्ट सरकार द्वारा स्वीकृत (Approved) है या नहीं और बिल्डर के खिलाफ कितने ग्राहकों ने शिकायतें (Complaints/Disputes) दर्ज करा रखी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: यूपी भूलेख में ‘टिप्पणी’ का कॉलम खाली है, क्या इसका मतलब जमीन 100% सुरक्षित है?

उत्तर: यदि खतौनी में ‘टिप्पणी’ (Remarks) का कॉलम खाली है, तो यह एक बहुत अच्छा संकेत है कि राजस्व रिकॉर्ड में उस पर कोई विवाद, स्टे या बैंक लोन नहीं है। फिर भी, 100% सुरक्षा के लिए आपको सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से ‘भारमुक्त प्रमाण पत्र’ (Encumbrance Certificate) और स्थानीय पड़ोसियों से भी भौतिक पूछताछ (Physical Verification) कर लेनी चाहिए।

प्रश्न 2: गाटा संख्या (Gata Number) और खसरा संख्या (Khasra Number) में क्या अंतर है?

उत्तर: राजस्व विभाग की भाषा में ये दोनों लगभग एक ही होते हैं। यह जमीन के एक विशिष्ट टुकड़े को दी गई एक यूनिक सरकारी पहचान संख्या (Unique ID Number) होती है, जिसके आधार पर जमीन की पूरी जानकारी निकाली जाती है।

प्रश्न 3: अगर जमीन पर कोर्ट का स्टे (Stay Order) लगा है, तो क्या मैं उसे खरीद सकता हूँ?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। यदि किसी जमीन पर सक्षम न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश (Stay Order) पारित किया गया है, तो उस जमीन की खरीद-बिक्री (Registry) पूरी तरह से अवैध मानी जाती है। जब तक कोर्ट से स्टे हट (Vacate) न जाए, आपको उस संपत्ति में अपना पैसा नहीं फंसाना चाहिए।

प्रश्न 4: क्या मैं ऑनलाइन चेक कर सकता हूँ कि जमीन पर कोई बैंक लोन है या नहीं?

उत्तर: जी हाँ। यदि किसान ने कृषि भूमि पर बैंक से लोन (KCC आदि) लिया है, तो बैंक इसकी जानकारी तहसील में भेजता है और लेखपाल उसे खतौनी की ‘टिप्पणी’ में दर्ज कर देता है जिसे आप UP Bhulekh पोर्टल पर देख सकते हैं। वहीं गैर-कृषि भूमि (मकान/प्लॉट) के लोन की जानकारी IGRS पोर्टल के भारमुक्त प्रमाण पत्र में मिल जाती है।

महत्वपूर्ण डायरेक्ट लिंक्स (Important Direct Links)

जमीन का खसरा/खतौनी देखने, कोर्ट केस चेक करने और अन्य महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाओं के लिए आधिकारिक डायरेक्ट लिंक्स नीचे दी गई तालिका में उपलब्ध करा दिए गए हैं। ये लिंक्स आपके डिवाइस के डार्क और लाइट दोनों मोड में पूरी तरह स्पष्ट दिखाई देंगे:

महत्वपूर्ण सेवाएँ (Service Name) डायरेक्ट लिंक (Click Here)
जमीन का विवाद / खतौनी चेक करें (UP Bhulekh Portal) यहाँ क्लिक करें
कोर्ट केस स्टेटस चेक करें (eCourts India Portal) यहाँ क्लिक करें
भारमुक्त प्रमाण पत्र (12 साला) के लिए आवेदन (IGRS UP) यहाँ क्लिक करें
बिल्डर / प्रोजेक्ट का रेरा अप्रूवल चेक करें (UP RERA) यहाँ क्लिक करें
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