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मैरिज सर्टिफिकेटऑनलाइन कैसे बनाएं, आवेदन, फीस, आवश्यक दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया

मैरिज सर्टिफिकेटऑनलाइन कैसे बनाएं, आवेदन, फीस, आवश्यक दस्तावेज और पूरी प्रक्रिया

भारतीय समाज में विवाह एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। लेकिन आधुनिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में, केवल सामाजिक या धार्मिक रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के वर्ष 2006 के एक ऐतिहासिक फैसले और महिला अधिकार संरक्षण कानूनों के अनुसार, सभी धर्मों और वर्गों के नागरिकों के लिए अपनी शादी का कानूनी रूप से पंजीकरण (Marriage Registration) कराना अनिवार्य कर दिया गया है। शादी के बाद सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला मैरिज सर्टिफिकेट (Marriage Certificate) या विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और वैध कानूनी दस्तावेज है, जो पति और पत्नी दोनों के अधिकारों की रक्षा करता है।

पहले के समय में मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने के लिए नवविवाहित जोड़ों को कोर्ट या रजिस्ट्रार ऑफिस (Registrar Office) के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे और अक्सर दलालों (Agents) को भारी फीस देनी पड़ती थी। लेकिन अब डिजिटल इंडिया (Digital India) अभियान के तहत अधिकांश राज्य सरकारों ने विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन (Online) कर दिया है। आप अपने राज्य के स्टाम्प एवं निबंधन विभाग (जैसे यूपी में IGRSUP) या ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और केवल एक दिन अपॉइंटमेंट लेकर ऑफिस में जाकर अपना सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। इस विस्तृत लेख में हम मैरिज सर्टिफिकेट के उपयोग, फायदे, आवश्यक दस्तावेज, पात्रता और ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया के बारे में गहराई से जानेंगे।

मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना क्यों जरूरी है? (Top Benefits & Uses)

मैरिज सर्टिफिकेट केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों के लिए एक अनिवार्य ‘मास्टर डॉक्यूमेंट’ है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • 1. पासपोर्ट और स्पाउस वीज़ा (Passport & Spouse Visa): शादी के बाद पत्नी के पासपोर्ट में पति का नाम जुड़वाने या विदेश यात्रा के लिए स्पाउस वीज़ा (Spouse Visa) / डिपेंडेंट वीज़ा अप्लाई करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है।
  • 2. बैंक और बीमा कार्य (Banking & Insurance): पति-पत्नी का जॉइंट बैंक अकाउंट (Joint Account) खुलवाने, बैंक में नॉमिनी (Nominee) बनाने, या जीवन बीमा (Life Insurance) का क्लेम प्राप्त करने में यह प्रमाण पत्र कानूनी उत्तराधिकार सिद्ध करता है।
  • 3. संपत्ति के अधिकार और पारिवारिक विवाद: संपत्ति की खरीद-फरोख्त, पारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदारी, या दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में तलाक (Divorce), गुजारा भत्ता (Alimony) और बच्चों की कस्टडी के कानूनी मामलों में कोर्ट सबसे पहले विवाह का कानूनी प्रमाण मांगता है।
  • 4. महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा: यह प्रमाण पत्र महिलाओं को वैवाहिक धोखाधड़ी (Marital Fraud), बाल विवाह (Child Marriage) और पति द्वारा छोड़े जाने की स्थिति में कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
  • 5. नाम और पता बदलवाने के लिए: शादी के बाद पत्नी का सरनेम (Surname) बदलने, आधार कार्ड या पैन कार्ड में पति का नाम और नया पता अपडेट कराने के लिए यह सबसे मजबूत ‘Valid Proof’ माना जाता है।

विवाह पंजीकरण के लिए कानूनी नियम और पात्रता (Eligibility Criteria)

भारत में विवाह का पंजीकरण मुख्य रूप से दो कानूनों के तहत किया जाता है: हिंदू विवाह अधिनियम 1955 (Hindu Marriage Act) और विशेष विवाह अधिनियम 1954 (Special Marriage Act)। ऑनलाइन आवेदन करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप निम्नलिखित शर्तें पूरी करते हैं:

  • वैध आयु (Legal Age): विवाह के समय लड़के (Groom) की आयु न्यूनतम 21 वर्ष और लड़की (Bride) की आयु न्यूनतम 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए। उम्र एक दिन भी कम होने पर आवेदन निरस्त हो जाएगा।
  • मानसिक स्थिति: विवाह के समय दोनों पक्ष (पति और पत्नी) मानसिक रूप से स्वस्थ (Sound Mind) होने चाहिए और अपनी पूर्ण सहमति देने में सक्षम होने चाहिए।
  • जीवित जीवनसाथी न हो: विवाह के समय किसी भी पक्ष का कोई पूर्व जीवित पति या पत्नी नहीं होना चाहिए (सिवाय इसके कि पहले से कानूनी रूप से तलाक हो चुका हो या जीवनसाथी की मृत्यु हो चुकी हो)।
  • निषिद्ध रिश्ते (Prohibited Relationship): दोनों पक्ष ऐसे किसी रिश्ते में नहीं होने चाहिए जो उनके धर्म या कानून के अनुसार विवाह के लिए निषिद्ध (अवैध) माना जाता हो।

ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents Checklist)

मैरिज सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पति, पत्नी और गवाहों के दस्तावेजों की पीडीएफ (PDF) या जेपीजी (JPG) कॉपी पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। कृपया नीचे दी गई सूची के अनुसार अपने सभी कागजात पहले से स्कैन करके तैयार रखें:

  • पहचान का प्रमाण (Identity Proof): पति और पत्नी दोनों का आधार कार्ड (Aadhaar Card), पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट।
  • आयु का प्रमाण (Age Proof): 10वीं कक्षा की मार्कशीट / बोर्ड सर्टिफिकेट, जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा जारी आयु प्रमाण पत्र।
  • निवास का प्रमाण (Address Proof): राशन कार्ड, बिजली का बिल, निवास प्रमाण पत्र या पासपोर्ट। (लड़की के लिए शादी से पहले का मायके का निवास प्रमाण भी लगता है)।
  • शादी का स्पष्ट प्रमाण (Proof of Marriage): प्रिंट किया हुआ शादी का निमंत्रण पत्र (Wedding Invitation Card) और शादी समारोह की कम से कम 2 से 3 स्पष्ट तस्वीरें (जिसमें फेरे लेते हुए, सिंदूर दान करते हुए या वरमाला डालते हुए पति-पत्नी साफ दिखाई दे रहे हों)।
  • फोटोग्राफ्स (Photographs): पति और पत्नी दोनों की अलग-अलग 4-4 पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और एक जॉइंट (Joint) फोटो।
  • गवाहों के दस्तावेज (Witness Documents): शादी के पंजीकरण के लिए कम से कम 2 गवाहों (कुछ मामलों में 3 गवाहों) की आवश्यकता होती है। गवाहों का आधार कार्ड, पैन कार्ड और 2-2 पासपोर्ट साइज फोटो।
  • शपथ पत्र (Affidavits): पति और पत्नी दोनों की ओर से एक निर्धारित प्रारूप (Format) में नोटरी द्वारा प्रमाणित शपथ पत्र। (यह शपथ पत्र राज्य के पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है)।

मैरिज सर्टिफिकेट ऑनलाइन कैसे बनाएं? (Step-by-Step Registration Process)

विवाह पंजीकरण की ऑनलाइन प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बना दिया गया है। हम यहाँ उत्तर प्रदेश के IGRSUP और भारत सरकार के ServicePlus पोर्टल का एक सामान्य उदाहरण देकर पूरी प्रक्रिया समझा रहे हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें: सबसे पहले अपने राज्य के स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग की वेबसाइट पर जाएं। (जैसे उत्तर प्रदेश के लिए igrsup.gov.in, मध्य प्रदेश के लिए mp e-nagarpalika, दिल्ली के लिए e-district delhi)।
  2. नया पंजीकरण (New Sign Up): होमपेज पर ‘विवाह पंजीकरण’ (Marriage Registration) सेक्शन में ‘आवेदन करें’ (Apply) पर क्लिक करें। पति या पत्नी में से किसी एक का आधार नंबर दर्ज करके ओटीपी (OTP) के माध्यम से अपना एक अकाउंट बनाएं और पासवर्ड सेट करें।
  3. पति (Groom) का विवरण भरें: पोर्टल में लॉगिन करने के बाद सबसे पहले पति की जानकारी भरें। इसमें पति का नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, धर्म, व्यवसाय, मोबाइल नंबर, ईमेल और शादी से पहले व बाद का पूरा पता दर्ज करें।
  4. पत्नी (Bride) का विवरण भरें: इसके बाद पत्नी की पूरी जानकारी (शादी से पहले का नाम और पता, जन्मतिथि आदि) सावधानीपूर्वक भरें।
  5. विवाह स्थल का विवरण (Marriage Details): वह तिथि (Date) चुनें जिस दिन आपकी शादी हुई थी। साथ ही उस स्थान (मैरिज हॉल, मंदिर, आर्य समाज या घर) का पूरा पता दर्ज करें जहाँ विवाह संपन्न हुआ था।
  6. दस्तावेज अपलोड करें (Document Upload): फॉर्म में मांगे गए सभी पहचान पत्र, आयु प्रमाण पत्र, शादी का कार्ड, शपथ पत्र और शादी की तस्वीरों को सही साइज (आमतौर पर 100KB से 200KB के बीच) में अपलोड करें।
  7. गवाहों का विवरण (Witness Entry): अपने दोनों या तीनों गवाहों (Witness) का नाम, पता, उम्र और उनका आधार/पैन नंबर दर्ज करें।
  8. ऑनलाइन फीस भुगतान (Online Payment): फॉर्म को ‘Preview’ करके जांच लें। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा निर्धारित विवाह पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से करें। (यह फीस शादी के कितने दिन बाद आवेदन कर रहे हैं, उस आधार पर ₹100 से ₹1000 तक हो सकती है)।
  9. पावती और अपॉइंटमेंट (Acknowledgement & Slot Booking): फीस कटने के बाद आपके सामने एक पावती रसीद (Acknowledgement Slip) आ जाएगी। इसी के साथ आपको अपने जिले के उप-निबंधक (Sub-Registrar/Tehsil) कार्यालय में जाने के लिए एक तारीख और समय (Appointment Slot) चुनना होगा।
  10. रजिस्ट्रार ऑफिस विजिट (Final Verification): चुनी हुई तारीख पर पति, पत्नी और दोनों गवाहों को अपने सभी ओरिजिनल दस्तावेजों (Original Documents) और फॉर्म के प्रिंट आउट के साथ मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचना होगा। वहां अधिकारी आपके दस्तावेजों की जांच करेंगे और आपका बायोमेट्रिक/डिजिटल सिग्नेचर लेंगे। सब कुछ सही होने पर उसी दिन या 24 घंटे के भीतर आपका ‘विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र’ ऑनलाइन जनरेट कर दिया जाएगा, जिसे आप पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण डायरेक्ट लिंक्स (Official Direct Links 2026)

महत्वपूर्ण सेवाएँ (Service Name) डायरेक्ट लिंक (Click Here)
विवाह पंजीकरण आवेदन करें (UP IGRSUP Portal) यहाँ क्लिक करें
अन्य राज्यों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल (ServicePlus) यहाँ क्लिक करें
आवेदन की स्थिति ट्रैक करें (Track Application Status) यहाँ क्लिक करें
फोटो/डॉक्यूमेंट रिसाइज़, कंप्रेस और पीडीएफ टूल्स (Premium Tools) उपयोगी टूल्स लिंक
मैरिज सर्टिफिकेट डाउनलोड करें (Download Verified Certificate) यहाँ क्लिक करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs – Marriage Certificate)

Q1. शादी होने के कितने दिनों के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य है?

उत्तर: नियम के अनुसार, विवाह संपन्न होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन कर देना चाहिए। यदि आप 30 दिन के भीतर आवेदन करते हैं, तो कोई लेट फीस नहीं लगती। हालाँकि, यदि आप किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाते हैं, तो आप 5 साल या 10 साल बाद भी अपना पंजीकरण करवा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको विलंब शुल्क (Late Fee) और देरी का कारण बताने वाला एक अतिरिक्त शपथ पत्र (Delay Affidavit) देना होगा।

Q2. क्या गवाहों (Witnesses) का हमारे परिवार का सदस्य या रिश्तेदार होना जरूरी है?

उत्तर: नहीं, यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है कि गवाह आपके परिवार के ही सदस्य हों। कोई भी वयस्क व्यक्ति (18 वर्ष से अधिक) जिसने आपकी शादी में शिरकत की हो, वह आपका गवाह बन सकता है। गवाह आपका दोस्त, पड़ोसी या सहकर्मी भी हो सकता है। बस शर्त यह है कि उनके पास एक वैध पहचान पत्र (आधार कार्ड या पैन कार्ड) और पासपोर्ट साइज फोटो होनी चाहिए, और उन्हें रजिस्ट्रार ऑफिस में उपस्थित होना होगा।

Q3. क्या आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir) में हुई शादी का सर्टिफिकेट सरकारी कार्यों के लिए पर्याप्त है?

उत्तर: आर्य समाज मंदिर द्वारा जारी किया गया शादी का प्रमाण पत्र एक वैध धार्मिक दस्तावेज है, लेकिन पासपोर्ट बनवाने या वीज़ा (Visa) के लिए यह अंतरराष्ट्रीय और सरकारी स्तर पर सीधे तौर पर मान्य नहीं होता है। आर्य समाज का सर्टिफिकेट केवल यह साबित करता है कि आपकी शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई है। आपको इस मंदिर के सर्टिफिकेट के आधार पर सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (सरकारी पोर्टल) में आवेदन करके सरकारी ‘विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र’ प्राप्त करना ही होगा।

Q4. हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) और विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) में क्या अंतर है?

उत्तर: हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत उन जोड़ों का पंजीकरण किया जाता है जो हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख धर्म से संबंधित हैं और जिन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों से शादी की है। वहीं, विशेष विवाह अधिनियम 1954 (कोर्ट मैरिज) के तहत कोई भी जोड़ा (चाहे वे अलग-अलग धर्म या जाति के हों) बिना किसी धार्मिक अनुष्ठान के सीधे कोर्ट में जाकर कानूनी रूप से शादी और पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए 30 दिन का पब्लिक नोटिस पीरियड होता है।

Q5. क्या पति और पत्नी के पते (Address) अलग-अलग राज्यों के होने पर पंजीकरण में कोई समस्या आती है?

उत्तर: कोई समस्या नहीं आती है। विवाह पंजीकरण के नियमों के अनुसार, आप अपना मैरिज सर्टिफिकेट तीन जगहों में से किसी भी एक जगह के रजिस्ट्रार ऑफिस से बनवा सकते हैं: 1. जहाँ पति का स्थायी निवास हो, 2. जहाँ पत्नी का शादी से पहले का स्थायी निवास हो, या 3. जहाँ विवाह संपन्न हुआ हो (Marriage Venue)। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी एक अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) चुन सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख देश के नागरिकों को विवाह पंजीकरण के कानूनी अधिकारों और ऑनलाइन प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। भारत के अलग-अलग राज्यों के स्टाम्प एवं निबंधन विभागों के पोर्टल्स (e-District), आवेदन शुल्क और प्रक्रिया में मामूली अंतर या बदलाव हो सकते हैं। अतः अंतिम रूप से आवेदन करने से पहले कृपया अपने राज्य के आधिकारिक ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल या राजस्व विभाग की वेबसाइट का अवलोकन अवश्य करें और आवश्यक होने पर किसी कानूनी सलाहकार की मदद लें।